: आमजन से अपील-लू से बचे ’लू’ के लक्षण, क्या करें, क्या न करें
Thu, May 9, 2024
लू के लक्षण, बचाव व रोकथाम
सागरI ग्रीष्म ऋतु में तेज गर्मी पड़ने से गर्म हवा चलने लगती है जिसका मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पडता है एवं अन्य बीमारियों से पीड़ित होने की संभावना अधिक होने लगती हैं। सामान्य भाषा में इसे ’लू’ कहते हैं।
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लू’ के लक्षणः
-सिरदर्द, बुखार, उल्टी, अत्याधिक पसीना एवं बेहोशी आना, कमजोरी महसूस होना, शरी में ऐंठन, नब्ज असामान्य होना इत्यादि । ’लू’ के लक्षण होते व्यक्ति को छायादार जगह पर लिटायें, व्यक्ति के कपड़े ढ़ीले करें, उसे पेय पदार्थ कच्चे आम का पना आदि पिलायें, तापमान घटाने के लिये ठंडे पानी की पट्टियां रखें, प्रभावित व्यक्ति को तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र में लें जाकर चिकित्सकीय परामर्श लें।
क्या करे :-
घर से बाहर निकलने के पहले भरपेट पानी अवश्य पियें । सूती, ढीले एवं आरामदायक कपड़े पहनें, धूप में निकलते समय अपना सिर ढंककर रखें, टोपी/कपड़ा/छतरी का उपयोग करें । पानी, छाछ, ओ.आर.एस का घोल या घर में बनें पेय पदार्थ जैसे-लस्सी, नीबू पानी, आम का पना, इत्यादि का सेवन करें । भरपेट ताजा भोजन करके ही घर से निकलें, धूप में अधिक न निकलें ।
क्या न करेंः-
धूप में खाली पेट न निकलें, पानी हमेशा साथ में रखें, शरीर में पानी की कमी न होने दें। मिर्च मसाले युक्त एवं बासी भोजन न करें । बुखार आने पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें, कूलर या एयर कंडीशन से धूप में एकदम न निकलें ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी ने समस्त स्वास्थ्य संस्था प्रभारियों को निर्देश दिये हैं कि अपनी अपनी संस्था में उपचार एवं व्ययस्था बनाये रखें अपने अधीनस्थ स्टार्फे को रोकथाम एवं सावधानियों का प्रचार प्रसार करने हेतु निर्देशित करें । आमजन से अपील हैं कि अधिक तापमान होने के कारण विशेष कर शिशुओं तथा बच्चों, 65 वर्ष से अधिक आयु के महिला-पुरूष, मानसिक रोगियों तथा रक्तचाप वाले मरीजों का विशेष ध्यान रखें, घर से बाहर निकलने के पहले भरपेट पानी अवश्य पिये, सूती, ढीले एवं आरामदायक कपड़े पहनें, धूप में निकलते समय अपना सिर ढंककर रखें, टोपी कपड़ा/छतरी का उपयोग करें, भरपेट ताजा भोजन करके ही घर से निकलें, धूप में अधिक न निकल, पानी हमेशा साथ में रखें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, बुखार आने पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें, कूलर या एयर कंडीशन से धूप में एकदम न निकलें।
: बाल विवाह रोकथाम के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित
Wed, May 8, 2024
सागरI अक्षय तृतीया एवं विवाह मुहूर्तो पर सामूहिक विवाह सम्पन्न होते हैं जिसमें बाल विवाह होने की प्रबल संभावना होती है। इन अवसरों पर विशेष रूप से विवाह पर निगरानी रखने के लिए पूरे वर्ष अभियान के तौर पर बाल विवाह की रोकथाम हेतु कार्यवाही की जाती है।
अक्षय तृतीया 10 मई एवं अन्य विवाह मुहूर्तो पर होने वाले बाल विवाह की रोकथाम एवं निगरानी के लिए चाईल्ड लाईन के कार्यालय में जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कल्पना साहू को कंट्रोल रूम का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है एवं चाईल्ड लाईन का समस्त स्टाफ श्रीमती साहू को उनके निर्देशानुसार सहयोग प्रदान करेगा। जिले में बाल विवाह की सूचना का आदान प्रदान मोबाईल नम्बर 9977971233 एवं चाईल्ड लाईन सागर के फोन नं0. 07582- 514101 पर किया जा सकेगा।
: स्वास्थ्य विभाग ने जारी की लू से बचाव की एडवाइजरी
Tue, May 7, 2024
तापमान में बढ़ोत्तरी को देखते हुए लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है। साथ ही जिला अस्पताल से लेकर उपस्वास्थ्य केंद्र तक की संस्थाओं को लू के प्रकरणों के उपचार के लिए अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।लू के प्रारंभिक प्रबंधन के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में ओआरएस कॉर्नर बनाए गए हैं। उल्टी, दस्त, बुखार के प्रबंधन और उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं स्वास्थ्य केंद्रों में सुनिश्चित की गई हैं।
गंभीर और घातक हो सकती है लू
लू होने पर शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे हो सकती है या एकाएक भी आ सकती है। जटिल अवस्था होने पर किडनी काम करना बंद कर सकती है। लू लगने पर अगर तुरंत उपचार न किया जाए तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
लक्षणों की जल्द पहचान करके बीमारी की गंभीरता को किया जा सकता है कम
तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद पसीने का न आना, सिर में भारीपन और दर्द का अनुभव होना, अधिक प्यास लगना और पेशाब कम आना, भूख कम लगना, बेहोश होना, लू लगने के लक्षण है। इन लक्षणों की पहचान जल्द से जल्द किया जाना जरूरी है, जिससे शीघ्र उपचार शुरू किया जा सके।
डिहाइड्रेशन की स्थिति से बचें
तेज धूप और गर्मी में ज्यादा देर तक रहने के कारण शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि बहुत अधिक समय तक धूप के सीधे संपर्क में न रहे। तेज गर्मी होने पर अधिक मात्रा में पानी पीना, सर और कानों को कपड़े से अच्छी तरह से ढकना, हल्के सूती वस्त्र पहनना तथा धूप में चश्मा, छाता, टोपी एवं जूता पहनना जरूरी है। पसीना अधिक आने की स्थिति में ओआरएस घोल, लस्सी, मठ्ठा एवं फलों का रस पीना चाहिए । चक्कर या मितली आने पर छायादार स्थान पर रुक कर आराम करना, शीतल पानी अथवा उपलब्धता अनुसार फलों का रस, लस्सी आदि का सेवन किया जाना चाहिए। उल्टी होने, सर दर्द, तेज बुखार की स्थिति होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में सलाह लेनी चाहिए। लू लगने पर प्रारंभिक तौर पर व्यक्ति को पंखे के नीचे हवा में लेट कर आराम करवाना चाहिए। बुखार होने पर सिर पर ठंडे पानी की पट्टी लगानी चाहिए । छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का गर्मी के मौसम में विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
गंभीर स्थिति में स्वास्थ्य संस्था में लें उपचार
लू जानलेवा हो सकती है। लू लगने पर व्यक्ति शॉक में चला जाता है। लू लगने पर सबसे पहले मरीज को पानी पिलाकर शरीर के तापमान को कम करने के उपाय किए जाने चाहिए। शरीर में पानी की कमी ना हो इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। सामान्य तापमान के पानी में कपड़े को भिगोकर शरीर पर मलना चाहिए। मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।