भोपाल/मध्यप्रदेश में मोहन सरकार की : मिलावटखोरों पर मोहन सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक' अब बिना लाइसेंस दूध बेचना होगा गैर-कानूनी
पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी
Thu, Mar 12, 2026
मिलावटखोरों पर मोहन सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक': अब बिना लाइसेंस दूध बेचना होगा गैर-कानूनी

भोपाल/मध्यप्रदेश में 'सफेद दूध के काले कारोबार' और मिलावटखोरी को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। प्रदेश में अब शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर बाकी सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए सरकारी लाइसेंस/पंजीकरण (FSSAI) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के इस 'एक्शन मोड' के बाद अब बिना रजिस्ट्रेशन के दूध बेचना कानूनन अपराध माना जाएगा।
गली-मोहल्लों से लेकर बड़े सप्लायर तक सब रडार पर
नए नियमों के मुताबिक, अब चाहे गली-मोहल्ले में घर-घर दूध पहुँचाने वाले दूधिये हों या बड़े पैमाने पर दूध का उत्पादन करने वाले निजी सेंटर, सभी को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस की यह प्रक्रिया केवल कागजी नहीं होगी, बल्कि अब दूध ढोने वाली गाड़ियों, कैन और बर्तनों की भी समय-समय पर बारीकी से जांच की जाएगी ताकि संक्रमण और गंदगी की गुंजाइश न रहे।
मिलावट करने वाले सफेदपोशों' पर कसेगा शिकंजा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। लाइसेंस अनिवार्य होने से हर विक्रेता का डेटा सरकार के पास होगा, जिससे मिलावट की स्थिति में दोषियों की पहचान और उन पर कानूनी कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।
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