रीठी: सरकार और प्रशासन के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों को ठेंगा दिखाते हुए : रीठी में 'सेटिंग' का खेल, अफसरों की नाक के नीचे खेत में हो अवैध प्लाटिंग
पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी
Tue, Mar 17, 2026
न रेरा, न डायवर्सन: रीठी में बस 'सेटिंग' का खेल; अफसरों की नाक के नीचे खेत में हो अवैध प्लाटिंग

रीठी: सरकार और प्रशासन के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों को ठेंगा दिखाते हुए रीठी तहसील में भू-माफियाओं का राज चल रहा है। यहाँ कायदे-कानून कागजों तक सीमित हैं और जमीनी हकीकत सिर्फ एक शब्द पर टिकी है— 'सेटिंग'। तहसील के प्राइम लोकेशन, विशेषकर सीएम राइज स्कूल के सामने और बाईपास जैसे क्षेत्र में बिना किसी वैध अनुमति के धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। माफिया अवैध प्लाटिंग करने में लगे हैं।
नियमों की धज्जियां: न रेरा का डर, न टीएंडसीपी की अनुमति
नियम कहते हैं कि किसी भी कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित करने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) से लेआउट पास होना और रेरा (RERA) में पंजीयन अनिवार्य है। लेकिन रीठी में भू-कारोबारियों ने इन नियमों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है। बिना डायवर्सन कराए, सीधे कृषि भूमि पर जेसीबी चलाकर सड़कें डाल दी गईं और प्लॉटों की मार्किंग शुरू कर दी गई। यह सब किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है।
पटवारी, आरआई और तहसीलदार: आखिर किसका है संरक्षण?
इस पूरे खेल में सबसे संदिग्ध भूमिका हल्का पटवारी की नजर आ रही है। नियमतः अपने हल्के में होने वाले किसी भी अवैध निर्माण या भूमि उपयोग परिवर्तन की पहली रिपोर्ट पटवारी को करनी होती है।
* सवाल यह है: जब खेतों का सीना चीरकर सड़कें बनाई जा रही थीं, तब पटवारी कहाँ थे?
* क्या आरआई और तहसीलदार को अपने क्षेत्र में हो रहे इस बड़े बदलाव की भनक तक नहीं लगी?
* क्षेत्र में चर्चा है कि स्थानीय सरपंच, सचिव और रसूखदार नेताओं के साथ मिलकर एक 'मजबूत गठजोड़' तैयार किया गया है, जिसने प्रशासन के हाथ-पांव बांध दिए हैं।
'सेटिंग' के खेल में जनता की गाढ़ी कमाई पर खतरा
अवैध कॉलोनाइजर्स ने स्थानीय तंत्र को 'मैनेज' करके अपना काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन इसका खामियाजा उन मासूम खरीदारों को भुगतना होगा जो अपनी जीवन भर की जमापूंजी इन प्लॉटों में लगा देंगे।
* अवैध निर्माण: बिना डायवर्सन के कटी इन कॉलोनियों में कभी वैध बिजली कनेक्शन नहीं मिलेगा।
* सुविधाओं का अभाव: भविष्य में न तो पक्की सड़कें बनेंगी और न ही ड्रेनेज सिस्टम, क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में यह आज भी 'खेत' ही दर्ज है।
* बुलडोजर का साया: शासन के सख्त निर्देश हैं कि ऐसी अवैध प्लॉटिंग पर तत्काल बुलडोजर चलाया जाए। ऐसे में निवेश करने वालों के सिर पर हमेशा बेदखली की तलवार लटकी रहेगी।
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