माधवनगर पुलिस का शिकंजा: 9 नामजद आरोपियों पर FIR : माधव नगर खदान: नागपुर से कटनी तक रंगदारी का 'सिंडिकेट' खेल: बंद कमरों की मीटिंग्स में मांगी 75 लाख की फिरौती
पवन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ कटनी
Sun, Jul 12, 2026*माधव नगर खदान: नागपुर से कटनी तक रंगदारी का 'सिंडिकेट' खेल: बंद कमरों की मीटिंग्स में मांगी 75 लाख की फिरौती, बोले- 'पैसा दो, नहीं तो खदान दूसरों को बेच देंगे'*
*माधव नगर थाने में दर्ज FIR में उल्लेखित तथ्य खोल रहे कई राज*
कटनी। माधवनगर थाने में दर्ज हुए 'क्वांटम मिनरल्स' फर्म के 5 करोड़ के महाघोटाले में अब एक बेहद चौंकाने वाला और फिल्मी अंदाज में की गई रंगदारी का वाकया सामने आया है। पुलिस एफआईआर के पन्नों को खंगालने पर पता चला है कि यह सिर्फ कागजी जालसाजी का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे नागपुर से लेकर कटनी तक बकायदा गुप्त मीटिंग्स कर 'अंडरवर्ल्ड स्टाइल' में रंगदारी वसूलने का एक खौफनाक ताना-बाना बुना गया था।
मुख्य आरोपियों ने खदान चालू होते ही अपनी नीयत बदली और बंद कमरों में बुलाकर फरियादी को 75 लाख रुपये की अतिरिक्त फिरौती देने के लिए मजबूर किया।
*पहला अड्डा: नागपुर की गुप्त मीटिंग, 75 लाख की डिमांड*
* एफआईआर में दर्ज बयानों के मुताबिक, जब क्वांटम मिनरल्स ने सरकारी विभागों की एनओसी (NOC) और भारी-भरकम राशि खर्च कर टिकरिया मुड़वारा की खदान को चालू कराने की तैयारी पूरी कर ली, तभी आरोपियों ने अपना असली रंग दिखाया।
* मुख्य आरोपी आदिल अहमद और ओमप्रकाश पाठक ने एक सोची-समझी साजिश के तहत क्वांटम मिनरल्स के मालिक मनुवीर अग्रवाल को बातचीत के बहाने नागपुर बुलाया।
* नागपुर में हुई इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में सीधे तौर पर टेबल पर धमकी परोसी गई। आदिल अहमद और ओमप्रकाश पाठक ने दो टूक शब्दों में कहा— "हमें 75 लाख रुपये और दो, नहीं तो यह खदान हम किसी और को बेच देंगे।"
*दूसरा अड्डा: कटनी में दबाव की 'क्रोनोलॉजी'*
जब पीड़ित फर्म ने नागपुर की मीटिंग में इस नाजायज मांग का विरोध किया और कहा कि "पहले ही तुम्हें करोड़ों रुपये दिए जा चुके हैं, खदान चालू करने में करोड़ों का खर्च हो चुका है", तो यह सिंडिकेट बैकफुट पर जाने के बजाय और आक्रामक हो गया।
* नागपुर के बाद इस रंगदारी के खेल का दूसरा केंद्र कटनी बना।
* कटनी आते ही आरोपी आदिल अहमद ने पीड़ित पक्ष पर मानसिक और आर्थिक दबाव बनाना शुरू कर दिया।
* कटनी की बैठकों में लगातार यह धमकी दोहराई जाती रही कि यदि 75 लाख रुपये का इंतजाम तुरंत नहीं हुआ, तो वे इस खदान का सौदा किसी तीसरे पक्ष से कर देंगे।
*सौदा किसी और से कर भी लिया!*
इस धमकी के पीछे आरोपियों का इरादा कितना खतरनाक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बीच पीड़ित फर्म को पता चला कि आदिल अहमद ने इस खदान का सौदा 'विक्ट्री मिनरल्स' के मालिक पीयूष सरावगी और सतीश सरावगी (कटनी) के साथ गुपचुप तरीके से कर के पैसे भी ऐंठ लिए थे। यानी एक ही खदान को अलग-अलग मोहरों को दिखाकर करोड़ों रुपये अंदर करने का यह एक बड़ा सिंडिकेट नेटवर्क था।
*माधवनगर पुलिस का शिकंजा: 9 नामजद आरोपियों पर FIR*
जब पानी सिर से ऊपर चला गया और आरोपियों ने झूठे शपथ पत्र देकर खदान का काम भी बंद करवा दिया, तब क्वांटम मिनरल्स के प्रबंधक संजीव बोहरे ने माधवनगर थाने में मोर्चा खोला। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध क्रमांक 0624/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और 318(4) (जालसाजी और ठगी) के तहत मामला दर्ज किया है।
*इस रंगदारी सिंडिकेट के मुख्य चेहरे:* आदिल अहमद, हुज्जू, ओम प्रकाश पाठक, नानू मिश्रा, अमन मिश्रा, अलाउद्दीन, सरफराज अहमद, शबनम अहमद और तनवीर खान।
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