: कोरोना की 3 लहर ओर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राजनीति।
Sat, May 8, 2021
कोरोना की 3 लहर ओर दूसरी लहर का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा हे और ऐसी बीच केंद्र सरकार व कई कांग्रेस और अन्य पार्टी शासित राज्यों में समन्वय की कमी भी साफ खटक रही है। इन राज्यों खासकर कांग्रेस शासित और केंद्र के बीच तालमेल न होने से चिकित्सीय सुविधाओं के लिए मुश्किलें बढ़ी है और एक समग्र नीति पर काम करना मुश्किल लग रहा है। इससे राजनीतिक खटास भी बढ़ी है। ऐसा लग रहा है कि विपक्ष इस संकट के घड़ी में भी केंद्र को घेरने में कोई चूक नहीं छोड़ना चाहते हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन कॉल को लेकर उनपर कटाक्ष किया। लेकिन इसके पहले भी कई अन्य घटनाएं टकराव की ओर साफ इशारा करती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा बैठक का लाइव प्रसारण करने को लेकर तल्खी नजर आई थी। प्रधानमंत्री की आपत्ति पर केजरीवाल ने खेद जता दिया था। लेकिन ऑक्सीजन की कमी को लेकर केंद्र और राज्य पटरी पर नजर नहीं आये। अंततः हाई कोर्ट को दखल देना पड़ा।
उधर कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने उद्धव ठाकरे द्वारा कथित तौर पर प्रधानमंत्री को किये गए फोन कॉल पर जवाब न मिलने का आरोप लगाया था। इसके अलावा कांग्रेस शासित राज्य टीकाकरण को लेकर केंद्र को लगातार घेर रहे हैं।
कोरोना की भयावह स्थिति पर प्रधानमंत्री की नजर
केंद्र और राज्य सभी अपने तरह से कोरोना महामारी को रोकने का हर संभव प्रयास कर रहें हैं प्रधान मंत्री खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वे लगातार बैठकें कर रहे हैं। लेकिन कहीं न कहीं ऐसा भी प्रतीत होता है कि जिम्मेदारियां एक-दूसरे पर डालने की कोशिश की जा रही हैं। इतना हीं नहीं, विदेशों से बड़ी संख्या में मदद स्थिति को संभालने के लिये मंगाई गई है। लेकिन राज्य इस मदद के समान वितरण को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
कोरोना संकट का अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का कहना हे की केंद्र सरकार के सामने कोविड संकट पर नियंत्रण की चुनौती है। क्योंकि इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई है। साथ ही इस संकट का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। विदेशी मदद और देश में चल रहे प्रयास से स्थिति पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन माना जा रहा है कि राज्यों में भरोसा पैदा करने के लिए केंद्र सरकार को कोविड की पहली लहर के दौरान अपनाई गई समग्र रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड संकट से निपटने के लिए राज्यों को केंद्र का सहयोग चाहिए। राज्यों को भी केंद्र द्वारा सुझाये गए मॉडल और उपायों की अनदेखी नही करनी चाहिए। क्योंकि ये राष्ट्रीय संकट है।
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: Breaking news-AIIMS में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन का कोरोना से निधन
Fri, May 7, 2021
Breaking news-अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन उर्फ़ सदाशिव का आज दिल्ली के एम्स अस्पताल में कोरोना संक्रमण के चलते 62 वर्ष के उम्र में निधन हो गया
बता दें कि छोटा राजन उर्फ़ सदाशिव तिहाड़ जेल परिसर की जेल नंबर 2 के अति सुरक्षित वार्ड में रखा गया था.छोटा राजन को विभिन्न आपराधिक मामलों में 10 साल तक की सजा भी हो चुकी है. ध्यान रहे छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम कभी एक ही गिरोह में हुआ करते थे लेकिन दाऊद की भारत विरोधी शक्तियों के साथ मिलने के बाद छोटा राजन उससे अलग हो गया था इसके बाद बैंकॉक में दाऊद के आदमियों ने छोटा राजन पर हमला भी किया था जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसके पेट की एक महत्वपूर्ण आंत को खासा नुकसान पहुंचा था.
इसके बाद छोटा राजन को सीबीआई द्वारा जारी कराए गए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर मलेशिया में गिरफ्तार कर लिया गया था और उसे भारत डिपोर्ट करके लाया गया था. भारत लाए जाने के बाद भी सुरक्षा कारणों के चलते उसे मुंबई की जेलों में नहीं रखा गया क्योंकि यह आशंका थी कि दाऊद समर्थित ग्रुप उसके खिलाफ षड्यंत्र रच सकते हैं और मुंबई की जेल में उस पर हमला हो सकता है. इस आशंका के मद्देनजर छोटा राजन को सभी मामलों की सजा भुगतने के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया था.
: सुप्रीम कोर्ट-केंद्र सरकार की याचिका खारिज बोला ऑक्सीजन सप्लाई पर हाईकोर्ट का आदेश सही
Fri, May 7, 2021
सुप्रीम कोर्ट ने आज ऑक्सीजन सप्लाई के मुद्दे पर कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जाने वाली केंद्र सरकार की अपील को खारिज कर दिया हे । जिसमें उसने कर्नाटक हाईकोर्ट के 1200 MT ऑक्सीजन देने के आदेश खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को राज्य के लिए 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करने का कर्नाटक उच्च न्यायालय का आदेश अच्छी तरह से जांचने के बाद और शक्ति के विवेकपूर्ण प्रयोग के तहत दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि हम कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं देंगे, क्योंकि हाईकोर्ट ने कैलिब्रेटेड अभ्यास किया है और हमें इसमें दखल देने का कोई कारण भी नहीं दिखता। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोरोना के 3.95 लाख मामलों पर कर्नाटक के मुताबिक 1700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। 1100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कर्नाटक की न्यूनतम आवश्यकता है।
बता दें कि बीते दिनों कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए राज्य में तरल चिकित्सकीय ऑक्सीजन (एलएमओ) की रोजाना आपूर्ति 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1200 मीट्रिक टन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामेल की सुनवाई हुई और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ के समक्ष सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य को इस समय 965 मीट्रिक टन एलएमओ की आपूर्ति की जा रही है और उस आदेश पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है। इसके बाद पीठ ने कहा कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले वह दस्तावेजों को देखेगी।
वहीं दिल्ली में ऑक्सीजन संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा है कि आप हमें कड़े फैसले के लिए मजबूर न करें। दिल्ली को प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही है। दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में कहा गया था कि उसके आदेश के बाद भी हर दिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि उसे हर दिन दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि उसे यह सप्लाई तब तक जारी रखनी होगी, जब तक कि आदेश की समीक्षा नहीं की जाती है या कोई बदलाव नहीं होता।
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