: लोकसभा में तीन नए क्रिमिनल लॉ बिल पास
Thu, Dec 21, 2023
लोकसभा में तीन नए क्रिमिनल लॉ बिल पास हो गए हैं। अब इसे राज्यसभा में रखा जाएगा। वहां से पास होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इसे पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- अग्रेजों के समय का राजद्रोह कानून खत्म किया गया है। नाबालिग से रेप और मॉबलिंचिंग जैसे क्राइम में फांसी की सजा दी जाएगी।
बिल पर लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि अंग्रेजों का बनाया राजद्रोह कानून, जिसके चलते तिलक, गांधी, पटेल समेत देश के कई सेनानी कई बार 6-6 साल जेल में रहे। वह कानून अब तक चलता रहा। मैंने राजद्रोह की जगह उसे देशद्रोह कर दिया है। क्योंकि अब देश आजाद हो चुका है, लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना कोई भी कर सकता है।
पहले रेप की धारा 375, 376 थी, अब जहां से अपराधों की बात शुरू होती है, उसमें धारा 63, 69 में रेप को रखा गया है। गैंगरेप को भी आगे रखा गया है। बच्चों के खिलाफ अपराध को भी आगे लाया गया है। मर्डर 302 था, अब 101 हुआ है। 18 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप में आजीवन कारावास और मौत की सजा का प्रावधान है। गैंगरेप के दोषी को 20 साल तक की सजा या जिंदा रहने तक जेल। प्रस्तावित कानून में गैर इरादतन हत्या को दो हिस्सों में बांटा गया है। अगर गाड़ी चलाते वक्त हादसा होता है, फिर आरोपी अगर घायल को पुलिस स्टेशन या अस्पताल ले जाता है तो उसे कम सजा दी जाएगी।
हिट एंड रन केस में 10 साल की सजा मिलेगी। मॉब लिंचिंग में फांसी की सजा होगी। स्नैचिंग के लिए कानून नहीं था, अब कानून बन गया है। किसी के सिर पर लाठी मारने वाले को सजा तो मिलेगी, इससे ब्रेन डेड की स्थिति में आरोपी को 10 साल की सजा मिलेगी। शाह ने कहा- नए कानून में अब पुलिस की भी जवाबदेही तय होगी। अब कोई गिरफ्तार होगा तो पुलिस उसके परिवार को जानकारी देगी। पहले यह जरूरी नहीं था। किसी भी केस में 90 दिनों में क्या हुआ, इसकी जानकारी पुलिस पीड़ित को देगी।
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: शिवराज सिंह चौहान को कद के हिसाब से बीजेपी में कौन कौन सी जिम्मेदारी मिल सकती है
Sat, Dec 16, 2023
शिवराज सिंह चौहान 2018 की ही तरह इस बार भी घर में नहीं बैठ रहे हैं. न ही मध्य प्रदेश छोड़ कर दिल्ली का रुख करने का उनका कोई इरादा है. ऐसे में जबकि न तो शिवराज सिंह चौहान ने राजनीति से संन्यास लेने जैसी कोई बात कही है, न ही बीजेपी नेतृत्व की तरफ से ऐसा कोई संकेत मिला है - ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में बढ़ रहा है?
जेपी नड्डा से पूछा गया था, आपने तीन कद्दावर तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को बैठने के लिए कहा, तो उनका जवाब था, 'बैठ जाइए नहीं, ये शब्द नहीं है हमारा... नए काम में लग जाइए... हम मिलकर तय करेंगे... इनको हम नया काम देंगे... ये हमारे वरिष्ठ नेता हैं... इनको 15-16 साल का अनुभव है.
बीजेपी अध्यक्ष का कहना है कि पार्टी साधारण कार्यकर्ता का उपयोग करने से भी पीछे नहीं हटती है. जेपी नड्डा ने अपनी तरफ से आश्वस्त किया है कि ऐसे नेताओं को उनके कद के हिसाब से काम मिलेगा और ये अच्छे तरीके से काम में लगाए जाएंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए जेपी नड्डा ने समझाया, प्रधानमंत्री मोदी जब संगठन में थे... जब उन्हें नॉर्थ का काम मिला, नॉर्थ गए... जब साउथ का काम मिला तो वहां जाकर काम किया... जब सीएम पद की जिम्मेदारी दी गई, तो उसे भी निभाया. बीजेपी अध्यक्ष ने ये भी बताया कि बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने इस्तीफा देकर पार्टी का काम संभाला है.
1. मध्य प्रदेश में ही बने रहने दिया जाये
2018 में जब मध्य प्रदेश में कमलनाथ की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी तो भी शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश नहीं छोड़ा था. बीजेपी में तब उनको राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बना दिया गया था, लेकिन वो कभी मध्य प्रदेश से कटे नहीं.
वसुंधरा राजे की तरह शिवराज सिंह चौहान के लिए भी दिल्ली में सेटल हो जाने का पूरा मौका था, लेकिन वो घुम फिर कर मध्य प्रदेश के लोगों के बीच ही बने रहने की कोशिश करते दिखे. और फिर सवा साल बात ही ज्योतिरादित्य सिंधिया की बदौलत वो मौका आ गया जब फिर से वो मुख्यमंत्री बन गये.
मध्य प्रदेश में वैसे तो मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ दो डिप्टी सीएम भी शपथ ले चुके हैं. केंद्र से भेजे गये नरेंद्र सिंह तोमर को स्पीकर बनाया जा चुका. ऐसे में शिवराज सिंह चौहान के कद का कोई पद मध्य प्रदेश में तो नहीं बचा दिखाई पड़ रहा है.
अपने बूते बीजेपी को चुनाव जिता देने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान ने अहंकार भाव का प्रदर्शन नहीं किया है. जब तक मुख्यमंत्री बनाये जाने की संभावना थी, कह रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी को वो 29 कमल की माला भेंट करना चाहते हैं, और बाद में ये कहने लगे कि पार्टी ने बहुत कुछ दिया है, अब पार्टी को कुछ देने का मौका है.
एक सूरत ये तो बनती ही है कि वो ज्यादा दिन तक नहीं, तो कम से कम 2024 के आम चुनाव तक बुधनी के विधायक बने रहें - और जहां तक आगे की बात है, अभी वो 64 साल के ही हैं. बीजेपी में रिटायरमेंट की अघोषित उम्र तो 75 साल है.
2. 'लाड़ली बहना' टाइप ब्रांड एंबेसडर बना दिये जायें
भले ही राजनीतिक विरोध के चलते कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता लाड़ली बहना जैसी कारगर स्कीम को खारिज कर दें, लेकिन जिस तरह से शिवराज सिंह चौहान को हर जगह महिलाओं का सपोर्ट मिल रहा है - बीजेपी चाहे तो आम चुनाव में केंद्र के लिए ऐसी ही कोई स्कीम लाकर शिवराज सिंह चौहान को उसका जिम्मा सौंप दे.
वैसे भी अगले लोक सभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून लाने का श्रेय लेने के साथ साथ महिलाओं के वोट के लिए बीजेपी जोर शोर से प्रचार प्रसार करेगी ही. ऐसी एक झलक जयपुर में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान देखा ही जा चुका है, जिसमें पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथ में थी.
मोदी सरकार में भी महिलाओं के लिए योजना तो है ही, शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना और महिला आरक्षण कानून की थीम को जोड़ कर कोई कार्यक्रम बनाया जा सकता है - और उसका चेहरा शिवराज सिंह चौहान को बनाया जा सकता है.
3. देश के किसी राजभवन में भेज दिया जाये
सीनियर नेताओं के समर्थकों की नाराजगी से बचने के लिए बीजेपी उनको राज्यपाल बनाकर किसी राजभवन में भेज दिया करती है. राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र भी ऐसी ही एक मिसाल हैं. यूपी के ब्राह्मण वोटर को संदेश देने के लिए उनको केंद्र से हटाने के बाद ऐसी ही जिम्मेदारी दी गयी थी. वैसे भी यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ठाकुरवाद की राजनीति के आरोपों को बैलेंस करने के लिए बीजेपी ऐसे प्रयोग करती रहती है.
राजस्थान के ही सीनियर नेता गुलाब चंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाया गया है. चुनावों के दौरान वो अपने घर उदयपुर पहुंचे थे, और कांग्रेस का आरोप था कि राज्यपाल होने के बावजूद वो विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए कैंपेन पर नजर रख रहे हैं. हालांकि, कुछ दिन बाद ही वो असल लौट गये थे.
शिवराज सिंह चौहान के कद के हिसाब से बीजेपी के पास उनको किसी राज्य का गवर्नर बनाने का ऑफर भी हो सकता है. एक मुश्किल ये जरूर है कि शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी शासित राज्यों में ही ये जिम्मेदारी दी जा सकती है - क्योंकि विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में तो कड़क मिजाज वाले की जरूरत होती है.
4. मोदी कैबिनेट में भी जगह खाली तो है ही
विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों को उम्मीदवार बना कर मध्य प्रदेश भेज दिया था. उनमें से एक कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर को अब स्पीकर बनाया जा चुका है. कृषि मंत्रालय का काम फिलहाल आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा देख रहे हैं - अगर शिवराज सिंह चौहान को भी स्वीकार हो तो उनके ये जिम्मेदारी दी जा सकती है.
वैसे भी बीजेपी को ऐसे कृषि मंत्री की जरूरत तो है ही जो किसानों के बीच जाकर बीजेपी के प्रति सपोर्ट बेस को बढ़ाने की कोशिश कर सके. कृषि कानून वापस ले लिये जाने के बाद बीजेपी भले ही चुनाव जीत रही हो, लेकिन बीजेपी भी महसूस कर रही है कि किसानों ने मोदी के मुंह से तपस्या में कमी की बात सुनने के बाद भी बीजेपी को मन से माफ नहीं किया है.
5. नड्डा के बाद बीजेपी की कमान
लोक सभा चुनावों को देखते हुए जेपी नड्डा को जून, 2024 बीजेपी अध्यक्ष के रूप में एक्सटेंशन मिला हुआ है. ऐसे में एक संभावना ये भी बनती है कि जेपी नड्डा के बाद ये मौका शिवराज सिंह चौहान को देने पर विचार किया जाये. हालांकि, इस बात की कम ही संभावना लगती है.
शिवराज सिंह चौहान बीजेपी का ओबीसी चेहरा हैं. और जिस तरह से विपक्ष पिछड़े वर्ग के लोगों को उनका हक दिलाने के नाम पर जातीय जनगणना की मांग कर रहा है, शिवराज सिंह चौहान बीजेपी की तरफ से उसका मजबूत जवाब हो सकते हैं.
लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में बीजेपी के पास सबसे बड़ा ओबीसी चेहरा पहले से ही मौजूद है तो किसी और को मोर्चे पर तैनात करने की बहुत जरूरत भी नहीं लगती. वैसे भी विधानसभा चुनावों के नतीजे तो जातीय राजनीति के मुद्दे को खारिज ही कर चुके हैं.
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भाजपा के हाथ लगा बड़ा ब्रह्मास्त्र, राम लल्ला ही नहीं अब, ”महादेव” से भी मिलेगी मदद
: भाजपा के हाथ लगा बड़ा ब्रह्मास्त्र, राम लल्ला ही नहीं अब, ''महादेव'' से भी मिलेगी मदद
Fri, Dec 15, 2023
आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह आशीर्वाद कैसे मिला। दरअसल भाजपा जहां राम लल्ला के मंदिर शुभारंभ की तैयारी में जुटी है, वहीं विपक्ष को ढेर करने के लिए भाजपा के हाथ बड़ा ब्रह्मस्त्र आ गया है और वह है महादेव ऐप का स्कैम। करीब 15000 करोड़ के स्कैम में छत्तीसगढ़ तथा मुंबई में मामले दर्ज हो चुके हैं और अब तक इस मामले में कई लोगों से पूछताछ हो चुकी है। पिछले दिनों ही महादेव बैटिंग ऐप के प्रमुख रवि उप्पल को दुबई में पुलिस ने हिरासत में लिया है और ई.डी. उसे भारत लाने की कोशिशों में जुट गई है।
महादेव ऐप के माध्यम से निशाने पर कांग्रेस
भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सरकार चला रही है तथा 2024 में पार्टी दोबारा सत्ता में आने के लिए कोशिशों में जुटी है। पार्टी जहां अपने पक्ष में वोट करवाने के लिए राम लल्ला का सहारा ले रही है, वहीं अब विपक्ष के वोट काटने के लिए महादेव ऐप का उसे सहारा मिल गया है। महादेव ऐप के माध्यम से विपक्ष खासकर कांग्रेस को घेरना भाजपा के लिए आसान हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी हाल ही में एक सभा के दौरान महादेव ऐप का जिक्र करते हुए कहा था कि इन्होंने तो महादेव को भी नहीं छोड़ा।
उनका इशारा कांग्रेस की तरफ था, क्योंकि कांग्रेस के छत्तीसगढ़ के पूर्व सी.एम. भूपेश बाघेल पर महादेव बैटिंग ऐप के प्रमोटरों से कथित तौर पर 508 करोड़ रुपए लेने का आरोप है।
अगला निशाना सौरव चंद्राकर
दुबई में रवि उप्पल को हिरासत में लिए जाने के बाद अब उसका प्रमुख हिस्सेदार सौरव चंद्राकर अगला निशाना हो सकता है। 28 वर्षीय चंद्राकर पहले दुबई में था, लेकिन बताया जा रहा है कि अब वह अपना लगातार ठिकाना बदल रहा है।
ई.डी. को मिली जानकारी के बाद यह बात सामने आई थी कि महादेव ऐप से जुड़े सौरव चंद्राकर दुबई के बाद श्रीलंका, आस्ट्रेलिया, लंदन तथा कैरिबियन में भी गया है। सूत्र बताते हैं कि फिलहाल सौरव चंद्राकर के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है, लेकिन उसके इंगलैंड में होने की संभावनाएं हैं।
70:30 के प्राफिट शेयरिंग के साथ बनाए जाते थे फ्रैंचाइजी
जानकारी मिली है कि सट्टेबाजी ऐप महादेव में आनलाइन बुक का काम रवि तथा सौरव ने मिलकर शुरू किया था, लेकिन इसमें बाद में कुछ और लोग भी जुड़ गए।
खबर के अनुसार रवि और सौरव ने इस ऐप को आगे बढ़ाने के लिए आगे फ्रैंचाइजी दे रखी थी, जिसमें प्राफिट शेयरिंग 70:30 होती थी। इसके तहत जो भी फ्रैंचाइजी बनाया जाता था, उसे बकायदा एक पैनल दिया जाता और पैनल के माध्यम से वह महादेव बुक को चलाता था। इस बुक में लगने वाले सभी पैसों के लिए पैनल आप्रेटर ही जिम्मेदार होता था, उसी की जिम्मेदारी होती थी कि वह बुक में लगी पूरी राशि मालिकों को दे, जिसके लिए अलग-अलग यूजर आई.डी. भी बनाकर दी जाती थी।
ये सब बातें ई.डी. की तरफ से पेश की गई चार्जशीट में अंकित हैं।
चंद्र अग्रवाल इंगलैंड के आफिस से करता था अपने पैनल को आप्रेट
खबर के अनुसार रवि उप्पल तथा सौरव चंद्राकर के साथ पंजाब के जालंधर से रिएल एस्टेट कारोबारी चंद्र अग्रवाल ने पहले तो फ्रैंचाइजी के तौर पर हाथ मिलाया था, लेकिन वह धीरे-धीरे इन दोनों के करीब होता गया तथा वह एक तरह से इनके काम में हिस्सेदार हो गया। बताया यह भी जा रहा है कि चंद्र अग्रवाल का दुबई तथा इंगलैंड में आफिस है, जहां पर यह महादेव बुक का काम किया जाता है।
पुलिस तथा ई.डी. को यह भी जानकारी मिली है कि दुबई का काम चंद्र का एक करीबी व्यक्ति देखता है, जबकि इंगलैंड में पूरा आफिस वह खुद देखता है। यहीं से वह महादेव ऐप के अपने पैनल को आप्रेट कर रहा था। इस ऐप के माध्यम से क्रिकेट, फुटबाल, टैनिस, पोकर और तीन पत्ती जैसे प्लेटफार्म पर जुए और सट्टेबाजी का काम चलता था।
पहले-पहले इसका बेस कैंप छत्तीसगढ़ था, लेकिन बाद में यह दुबई और इंगलैंड हो गया।
दुबई और लंदन के कई नाइट क्लबों में बड़ा निवेश
जानकारी के अनुसार यह भी खबर मिली है कि रवि तथा सौरव के साथ-साथ उसके कुछ करीबी लोगों ने जो महादेव ऐप में हिस्सेदार हैं तथा जिनका एफ.आई.आर. में भी नाम है, इन्होंने दुबई और लंदन में कई नाइट क्लबों और बार में बड़ा निवेश कर रखा है। जहां से इन्हें भारी कमाई हो रही है।
इस मामले में ई.डी. ने उन 32 लोगों को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है, जिनका नाम मुंबई में दर्ज एफ.आई.आर. में है। इनमें 6 लोग सौरव चंद्राकर के नजदीकी है, इनका काम भारत तथा मध्य पूर्व एशिया में मैचों को फिक्स करवाने का होता था।
ये सभी लोग महादेव ऐप तथा खिलाड़ी ऐप के माध्यम से जुड़े हुए थे, जिनको रोजाना करोड़ों की कमाई हो रही थी।
आखिर इंगलैंड ही क्यों है सेफ प्लेस?
खबर मिली है कि पुलिस तथा ई.डी. का शिकंजा कसता देख महादेव ऐप से जुड़े उक्त 32 लोगों में से जो अभी पुलिस के हाथ से दूर हैं, लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं। इनमें से अधिकतर के इंगलैंड में होने की संभावना है क्योंकि इंगलैंड से भारत में किसी भी आरोपी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया काफी जटिल है तथा ऐसे अधिकतर मामलों में भारत को अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। चाहे मेहुल चौकसी हो, नीरव मोदी हो, विजय माल्हा या ललित मोदी हो, इन सबके मामले में भारत अभी कोई सफलता हासिल नहीं कर पाया है, शायद यही कारण है ये सभी आरोपी इंगलैंड में शरण लेने की तैयारी कर रहे होंगे। वैसे बताया जा रहा है कि ये लोग भारत में अपने करीबी लोगों के संपर्क में हैं, जिनसे ये व्हाट्सअप या वीडियो कालिंग के माध्यम से बात कर रहे हैं।
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