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: विश्वविद्यालय क्षमता, कौशल एवं ज्ञान के विकास का महत्त्वपूर्ण केंद्र है- कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता

admin

Mon, Sep 23, 2024

सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र विभाग द्वारा 'एडवांस्ड रिसर्च टेक्निक फॉर केमिकल एनालिसिस एंड कैरक्टराइजेशन' विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के अबिमंच सभागार में संपन्न हुआ। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एनसी गौतम थे एवं अध्यक्षता कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने की। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में कई अत्यधिक परिष्कृत उपकरण है जिनकी ट्रेनिंग नई पीढ़ी के लिए अत्यावश्यक है। इसी आवश्यकता को देखते हुए कुलगुरु प्रो. नीलिमा गुप्ता की पहल पर विश्वविद्यालय अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट पर कार्यशाला आयोजित कर रहा है जिसके क्रम में यह दूसरी कार्यशाला है जिसमें देश भर के 60 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यशाला के समन्वयक प्रो. रत्नेश दास एवं डॉ. कल्पतरु दास हैं।
उदघाटन सत्र में कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि वैज्ञानिक शोध में एडवांस रिसर्च टेक्निक सीखना आवश्यक है तभी हम नए-नए रिसर्च कर सकेंगे। विश्वविद्यालय में इसके लिए आठ सेंटर हैं जिनमें विशेषीकृत उपकरण हैं और सभी क्रियाशील हैं। इसके अलावा भी विभिन्न प्रोजेक्ट्स एवं विभागों के पास भी उन्नत उपकरण हैं जिनको एकीकृत तरीके से नए सेंटर के रूप में विकसित किया जा सकता है ताकि इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग विद्यार्थी एवं शोधार्थी कर सकें। योजना बनाकर श्रमसाध्य तरीके से जब शोध किये जाते हैं तो उसके सकारात्मक परिणाम ही आते हैं। इसलिए शोधकर्ता को सदैव सकारात्मक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नया एकीकृत लैब जल्द ही बनकर तैयार हो रहा है। इसमें शोध सुविधाएं बढ़ाई जायेंगी जिसका फायदा शोधार्थियों को मिलेगा। विश्वविद्यालय क्षमता, कौशल एवं ज्ञान के विकास का महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यह कार्यशाला निश्चित तौर पर नए शोधार्थियों के लिए लाभकारी होगी।

शोध में सकारात्मकता प्रमुख पहलू- प्रो. एन सी गौतम

मुख्य अतिथि प्रो. एन सी गौतम ने कहा कि समय के साथ तकनीक बदल रही है। हमें नए तकनीक के साथ स्वयं को अपडेट रखना होगा। नए समय को देखते हुए प्रयोगशालाओं में क्यूआर कोड का उपयोग करना चाहिए। विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक सभी पाठ्यक्रम निर्माण, शोध की रूपरेखा निर्माण एवं सामग्री निर्माण की प्राविधि में संलग्न हों तभी शोध का एक वातावरण बनेगा और नयी पीढी में शोध के प्रति जागरूकता पैदा होगी। इंडस्ट्री को भी अपने कार्यक्रमों में शामिल करें ताकि भविष्य में वह विद्यार्थियों के लिए लाभकारी हो। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी विषय पर रिसर्च करने के साथ ही सार्वजनिक स्तर पर उसका प्रचार-प्रसार कर देना चाहिए जिससे वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम नागरिक भी नए शोधों से परिचित हो सके। किसी भी शोध में कई-कई वर्ष लग जाते हैं यह जरूरी नहीं की मनचाहे निष्कर्ष न मिल पाए तो वह रिसर्च व्यर्थ है। प्रत्येक शोध का एक चरण होता है। कई चरण के बाद ही हम अंतिम परिणाम तक पहुँचते हैं। हमें अपने अनुरूप आशाजनक परिणाम न भी मिले तो पुनः सकारात्मकता के साथ आगे बढना चाहिए। अपने आस-पास के महाविद्यालयों को भी शोध के प्रति रुझान पैदा करना चाहिए। एक विश्वविद्यालय होने के नाते हमारी यह जिम्मेदारी भी बनती है कि हम नए वैज्ञानिक शोधों के प्रति लोगों को जागरूक करें। सृजनात्मकता का वातावरण बनायें यही हमारी उपादेयता।
कार्यशाला में आईआईटी इंदौर के प्रो रजनीश मिश्रा, जीओल से श्रीनिवास पुजारी एवं राहुल ग्रोवर; लैब इंडिया से गांधी जी गिरिया; महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय से डॉ. मौली थॉमस; इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च भोपाल से प्रो.दीपक चोपड़ा; आईआईटी गुवाहाटी से प्रो. सुभाष पान; सहित विवि के प्रो रत्नेश दास, डॉ. अभिलाषा दुर्गावंशी, डॉ. के के डे, डॉ. के बी जोशी, डॉ. कल्पतरु दास, डॉ. पुष्पल घोष और डॉ. नीरज उपाध्याय कार्यशाला में सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक गतिविधियों का प्रशिक्षण देंगे। उदघाटन सत्र में प्रो. हेरेल थॉमस, प्रो. रत्नेस दास, प्रो. ए पी मिश्रा, प्रो. नवीन कानगो, डॉ. एस पी उपाध्याय, डॉ. आशुतोष, डॉ. पुष्पल घोष, डॉ. के बी जोशी सहित विवि के कई शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे.

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