: कर्त्तव्य के साथ अधिकार भी है मतदान - प्रलय श्रीवास्तव
Sat, May 4, 2024
भारतीय लोकतंत्र में निर्वाचन प्रक्रिया का विशेष महत्व है। लोकतंत्र की मजबूती और सार्थकता के लिए जरूरी है कि मतदान में प्रत्येक मतदाता की सहभागिता हो। मतदान से केवल उम्मीदवार या राजनैतिक दल का भविष्य ही नहीं बल्कि देश का भविष्य भी जुड़ा होता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे न सिर्फ लोकतंत्र मजबूत होता है बल्कि देश के विकास को नई दिशा भी मिलती है।
प्रत्येक मतदाता को संविधान द्वारा प्रदत्त मताधिकार का हरसंभव परिस्थितियों में उपयोग करना चाहिए। भारत निर्वाचन आयोग की भी अपेक्षा रहती है कि मतदाता बिना किसी भय या लालच अथवा भेदभाव के राष्ट्र हित में अपना वोट जरूर दें।वास्तव में व्यक्ति के एक वोट से उसके भविष्य का निर्माण होता है। लोकतंत्र में निर्वाचन के जरिए मतदाताओं को ईमानदार एवं सशक्त प्रतिनिधि चुनने का हक होता है। मतदान देश और समाज के सकारात्मक परिवर्तन की बुनियाद है। मतदान स्वयं के भाग्य का फैसला करने जैसा होता है।मध्यप्रदेश में तीसरे चरण के मतदान के लिए मतदान केन्द्रों में सभी आवश्यक सुविधाएँ जुटाई गई है। मतदाता जागरूकता से महिलाओं और युवाओं के पंजीयन के प्रतिशत में तो बढ़ोतरी दर्ज हुई है, पर वह ज्यादा मतदान के रूप में परिलक्षित हो, ऐसा हमारा प्रयास होना चाहिए । मतदान में अधिकाधिक भागीदारी के लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य और परिचितों को भी देश हित में वोट देने के लिए प्रेरित तथा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।एक-एक बहुमूल्य वोट मिलकर एक ऐसी सरकार बनाते हैं, जिससे सबका हित जुड़ा होता है। इसीलिए सभी वर्गों को मतदान का महत्व जानना और उसके इस्तेमाल में पूरी रूचि लेना चाहिए। मतदान को सुविधाजनक बनाने के लिए मतदाओं के वोटर आई.डी. बनवाये गये हैं। मतदान केन्द्र के संबंध में ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध करवाई गई। मतदान के लिए क्षेत्र में सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है।
मतदान के लिए 12 वैकल्पिक दस्तावेज भी
7 मई को होने वाले मतदान के लिए मतदाता पहचान पत्र नहीं होने की दशा में ई-मतदाता परिचय पत्र आयोग की वेबसाइट
https://voters-
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eci.gov.in/k
से डाउनलोड किये जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त 12 प्रकार के वैकल्पिक दस्तावेजों के माध्यम से भी मतदाता अपने मत का उपयोग कर सकते हैं।मतदाता परिचय पत्र के अलावा ई-मतदाता परिचय पत्र, आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक, पोस्ट ऑफिस की फोटो सहित पासबुक, श्रम मंत्रालय के अंतर्गत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, ड्रायविंग लायसेंस, पेन कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना के अंतर्गत जारी स्मार्ट कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, फोटोग्राफ सहित पेंशन दस्तावेज, केंद्र शासन, राज्य शासन, पीएसयूस और पब्लिक लिमिटेड कंपनी द्वारा जारी फोटोग्राफ सहित सर्विस पहचान कार्ड और एमपी, एमएलए व एमएलसी द्वारा जारी सरकारी पहचान पत्र निर्धारित किये गये है।
आईये, मतदान रूपी अपने इस मौलिक अधिकार और कर्त्तव्य का इस्तेमाल अवश्य करने का हम संकल्प लें।
मतदाता होने के गर्व के साथ।
मतदान के लिए तैयार हैं हम ।।
: रामलला का सूर्य की किरणों से सूर्य तिलक किया गया
Thu, Apr 18, 2024
देशभर में रामनवमी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । इस बार रामनवमी पर ख़ुशी का अलग ही नजारा रहा क्योकि अयोध्या में श्री राम अपने भव्य मंदिर में विराजे हुए है I अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजे रामलला का सूर्य की किरणों से सूर्य तिलक किया गया। जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला का यह पहला सूर्य तिलक है।दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक किया गया और मस्तक पर 3 मिनट तक सूर्य की किरणें पड़ीं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से रामलला के मंगल जन्मोत्सव का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर दिखाया गया। रामनवमी के अवसर पर सुबह रामलला सरकार का दिव्य अभिषेक किया गया। रामलला के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में भक्त अयोध्या पहुंचे।
: गुरु बिन वेद पढ़े जो प्राणी, समझे न सार, रहे अज्ञानी - संत रामपाल जी महाराज
Mon, Apr 15, 2024
दिनांक 14 अप्रैल 2024 जिले के बैतूल तहसील भीमपुर के ग्राम झापल में, दिन रविवार को जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन LCD द्वारा प्रसारित हुए। यह आध्यात्मिक ज्ञान श्रवण करने बहुत से श्रद्धालु सत्संग स्थल पर पहुंचे। सत्संग में संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि मनुष्य कितनी भी चतुराई करले, परंतु बिना सतगुरु के उसे मानव जीवन में मूल कर्तव्य क्या है? उसकी पहचान नहीं हो सकती है। क्योंकि मनुष्य लोकवेद- मनमानी मान्यताओं में इतना उलझा है कि वह स्वयं कभी नहीं सुलझ सकता है उस उलझन से।इसके लिए, आगे संत रामपाल जी महाराज ने प्रमाण बताते हुए कहा कि तत्वदर्शी संत हमें सर्व वेद-पुराणों का सार प्रमाण सहित समझा सकते हैं और वही सच्चे संत हमें मोक्षदायी भक्ति प्रदान कर, हमारा मनुष्य जीवन सफल कर सकते हैं।गुरु की शरण हमें परमात्मा कि कृपा सेप्राप्त होती है और सतगुरु द्वारा दी गई भक्ति ही हमारे पाप कर्म नष्ट कर हमें पूर्ण सुखी करती है। यदि हमें ईश्वर से मिलने वाले लाभ प्राप्त करने हैं तो केवल और केवल हमें सद्भक्ति करनी पड़ेगी अन्यथा जीवन बर्बाद है। गीता अध्याय 15 में पूर्ण तत्वज्ञानी के बारे में बताया है कि पूर्ण संतकी शरण में जाकर उनसे भक्ति साधना लेकर समझकर भक्ति प्रारम्भ करना ही हितकारी है। उपरोक्त कथन से सिद्ध है कि यदि शास्त्रविरुद्ध आराधनाएं करते है या बिना तत्वदर्शी संत के साधना करते हैं तो सब व्यर्थ है। गुरु बिन काहू न पाया ज्ञाना, ज्यों थोथा भुस छड़े किसाना।। तीर्थ व्रत अरु सब पूजा, गुरु बिन दाता और न दूजा। धनवृद्धि और सुखशांति जो कि पूर्ण गुरु दीक्षा के रूप में मंत्र जाप करने को देते हैं जिससे लाभ व मोक्ष प्राप्ति होती है। इस मंत्र का भेद केवल तत्वदर्शी संत ही दीक्षा प्रदान करते समय बताते हैं। इस सत्संग कार्यक्रम में एकदिवसीय निःशुल्क नाम दीक्षा