: Uttarakhand: चारधाम के 200 मीटर परिधि में मोबाइल बैन
Fri, May 17, 2024
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए और बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करन के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष दोगुनी संख्या में श्रद्धालुओं की संख्या देखने को मिल रही है, जो सरकार व प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि श्रद्धालु अब चारों धामों के मंदिर परिसर के 200 मीटर की परिधि में मोबाइल का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा पंजीकरण के बगैर कोई भी श्रद्धालु यात्रा नहीं कर सकेंगे। दरअसल, उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। ऐसे में उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दोगुनी संख्या में श्रद्धालु धामों में दर्शन को पहुंच रहे हैं। सभी श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। मुख्य सचिव ने बताया कि चारों धामों के मंदिर परिसर के 200 मीटर की परिधि में कोई भी श्रद्धालु मोबाइल का प्रयोग नहीं कर सकेगा। ताकि मोबाइल के दुरुपयोग को रोका जा सके और दर्शन को सुगम बनाया जाए।
बिना रजिस्ट्रेशन किसी को भी चारधाम के दर्शन नहीं
उत्तराखंड शासन ने देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि उनकी ओर से सभी श्रद्धालुओं को अवगत करा दिया जाए कि बिना रजिस्ट्रेशन किसी को भी चारधाम के दर्शन नहीं करने दिए जाएंगे। चेक पोस्ट पर पकड़े जाने पर उन्हें वहीं रोक दिया जाएगा, आगे नहीं जाने दिया जाएगा। व्यवस्थित व सुगम चारधाम यात्रा संचालन में यात्री नियमों का पालन करें।
: रामचरितमानस और पंचतंत्र UNESCO की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर' में शामिल हुए
Wed, May 15, 2024
रामचरितमानस, पंचतंत्र और सहृदयलोक-लोकन को 'यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर' में शामिल किया गया है। यह समावेशन भारत के लिए एक गौरव का क्षण है, जिससे देश की समृद्ध साहित्यिक विरासत और सांस्कृतिक विरासत की पुष्टि होती है। यह वैश्विक सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में हो रहे प्रयासों में एक कदम आगे बढ़ने का प्रतीक है, जो हमारी साझा मानवता को आकार देने वाली विविध कथाओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों को पहचानने और सुरक्षित रखने के महत्व पर प्रकाश डालता है। इन साहित्यिक उत्कृष्ट कृतियों का सम्मान करके, समाज न केवल उनके रचनाकारों की रचनात्मक प्रतिभा को श्रद्धांजलि देता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि उनका गहन ज्ञान और कालातीत शिक्षाएं भावी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहें और उनकी जानकारियां बढ़ाती रहें।
'रामचरितमानस', 'पंचतंत्र' और 'सहृदयालोक-लोकन' ऐसी कालजयी रचनाएं हैं जिन्होंने भारतीय साहित्य और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है, देश के नैतिक ताने-बाने और कलात्मक अभिव्यक्तियों को आकार दिया है। इन साहित्यिक कृतियों ने समय और स्थान से परे जाकर भारत के भीतर और बाहर दोनों जगह पाठकों और कलाकारों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उल्लेखनीय है कि 'सहृदयालोक-लोकन', 'पंचतंत्र' और 'रामचरितमानस' की रचना क्रमशः पं. आचार्य आनंदवर्धन, विष्णु शर्मा और गोस्वामी तुलसीदास ने की थी।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमेटी फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (MOWCAP) की 10वीं बैठक के दौरान एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उलानबटार में हुई इस सभा में, सदस्य देशों के 38 प्रतिनिधि, 40 पर्यवेक्षकों और नामांकित व्यक्तियों के साथ एकत्र हुए। तीन भारतीय नामांकनों की वकालत करते हुए, आईजीएनसीए ने 'यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर' में उनका स्थान सुनिश्चित किया।https://twitter.com/MinOfCultureGoI/status/1790404664619643124आईजीएनसीए में कला निधि प्रभाग के डीन (प्रशासन) और विभाग प्रमुख प्रोफेसर रमेश चंद्र गौड़ ने भारत से इन तीन प्रविष्टियों- राम चरित मानस, पंचतंत्र और सहृदयालोक-लोकन को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। प्रो. गौर ने उलानबटार सम्मेलन में नामांकनों का प्रभावी ढंग से समर्थन किया। यह उपलब्धि भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए आईजीएनसीए के समर्पण को प्रदर्शित करती है, साथ ही, वैश्विक सांस्कृतिक संरक्षण और भारत की साहित्यिक विरासत की उन्नति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। ऐसा पहली बार हुआ है जब आईजीएनसीए ने 2008 में अपनी स्थापना के बाद से क्षेत्रीय रजिस्टर में नामांकन जमा किया है।गहन विचार-विमर्श से गुजरने और रजिस्टर उपसमिति (आरएससी) से सिफारिशें प्राप्त करने और बाद में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों द्वारा मतदान के बाद, सभी तीन नामांकनों को शामिल किया गया, जिससे 2008 में रजिस्टर की स्थापना से पहले की महत्वपूर्ण भारतीय प्रविष्टियों को चिह्नित किया गया।
: कर्त्तव्य के साथ अधिकार भी है मतदान - प्रलय श्रीवास्तव
Sat, May 4, 2024
भारतीय लोकतंत्र में निर्वाचन प्रक्रिया का विशेष महत्व है। लोकतंत्र की मजबूती और सार्थकता के लिए जरूरी है कि मतदान में प्रत्येक मतदाता की सहभागिता हो। मतदान से केवल उम्मीदवार या राजनैतिक दल का भविष्य ही नहीं बल्कि देश का भविष्य भी जुड़ा होता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे न सिर्फ लोकतंत्र मजबूत होता है बल्कि देश के विकास को नई दिशा भी मिलती है।
प्रत्येक मतदाता को संविधान द्वारा प्रदत्त मताधिकार का हरसंभव परिस्थितियों में उपयोग करना चाहिए। भारत निर्वाचन आयोग की भी अपेक्षा रहती है कि मतदाता बिना किसी भय या लालच अथवा भेदभाव के राष्ट्र हित में अपना वोट जरूर दें।वास्तव में व्यक्ति के एक वोट से उसके भविष्य का निर्माण होता है। लोकतंत्र में निर्वाचन के जरिए मतदाताओं को ईमानदार एवं सशक्त प्रतिनिधि चुनने का हक होता है। मतदान देश और समाज के सकारात्मक परिवर्तन की बुनियाद है। मतदान स्वयं के भाग्य का फैसला करने जैसा होता है।मध्यप्रदेश में तीसरे चरण के मतदान के लिए मतदान केन्द्रों में सभी आवश्यक सुविधाएँ जुटाई गई है। मतदाता जागरूकता से महिलाओं और युवाओं के पंजीयन के प्रतिशत में तो बढ़ोतरी दर्ज हुई है, पर वह ज्यादा मतदान के रूप में परिलक्षित हो, ऐसा हमारा प्रयास होना चाहिए । मतदान में अधिकाधिक भागीदारी के लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य और परिचितों को भी देश हित में वोट देने के लिए प्रेरित तथा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।एक-एक बहुमूल्य वोट मिलकर एक ऐसी सरकार बनाते हैं, जिससे सबका हित जुड़ा होता है। इसीलिए सभी वर्गों को मतदान का महत्व जानना और उसके इस्तेमाल में पूरी रूचि लेना चाहिए। मतदान को सुविधाजनक बनाने के लिए मतदाओं के वोटर आई.डी. बनवाये गये हैं। मतदान केन्द्र के संबंध में ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध करवाई गई। मतदान के लिए क्षेत्र में सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है।
मतदान के लिए 12 वैकल्पिक दस्तावेज भी
7 मई को होने वाले मतदान के लिए मतदाता पहचान पत्र नहीं होने की दशा में ई-मतदाता परिचय पत्र आयोग की वेबसाइट
https://voters-
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eci.gov.in/k
से डाउनलोड किये जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त 12 प्रकार के वैकल्पिक दस्तावेजों के माध्यम से भी मतदाता अपने मत का उपयोग कर सकते हैं।मतदाता परिचय पत्र के अलावा ई-मतदाता परिचय पत्र, आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक, पोस्ट ऑफिस की फोटो सहित पासबुक, श्रम मंत्रालय के अंतर्गत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, ड्रायविंग लायसेंस, पेन कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना के अंतर्गत जारी स्मार्ट कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, फोटोग्राफ सहित पेंशन दस्तावेज, केंद्र शासन, राज्य शासन, पीएसयूस और पब्लिक लिमिटेड कंपनी द्वारा जारी फोटोग्राफ सहित सर्विस पहचान कार्ड और एमपी, एमएलए व एमएलसी द्वारा जारी सरकारी पहचान पत्र निर्धारित किये गये है।
आईये, मतदान रूपी अपने इस मौलिक अधिकार और कर्त्तव्य का इस्तेमाल अवश्य करने का हम संकल्प लें।
मतदाता होने के गर्व के साथ।
मतदान के लिए तैयार हैं हम ।।