: Joe Biden ने 28 चीनी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट,अमेरिकन्स को निवेश न करने की सलाह
Tue, Jun 8, 2021
चीन(China) और अमेरिका(America) के बीच तकरार खत्म होने का नाम नही ले रही बल्कि प्रतिदिन या अमेरिका चीन के खिलाफ कोई कड़ा लदमा उठाता है तो अगले दिन चीन अमेरिका पर पलटवार करता है।अब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन(Joe Biden) ने चीन के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए चीन की 28 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट(blacklist) कर दिया है।इन सभी कंपनियों को अमेरिका की सुरक्षा का हवाला देते हुए ब्लैकलिस्ट किया गया है।
कई विषेसज्ञों व बुद्धिजीवियों को ऐसा लग रहा था कि Joe Biden अमेरिका के पूर्वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प(Donald Trump) की तरह चीन पर सख्त नही होंगे लेकिन जो बाइडेन भी
चीन
को लेके डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों को ही आगे बढ़ा रहें है।उन्होंने चीन के खिलाफ एक के बाद एक कड़े कदम लेके सभी को सकते में दाल दिया है खासकर चीन और पाकिस्तान को।
आपको बताते चलें की अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने कार्यकाल में चीन की 31 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया था जिसमे चीन की कई टेलीकॉम,टेक्नोलॉजी से जुड़ी व कंस्ट्रक्शन कंपनियां शामिल थी।अब जो बाइडेन के 28 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने एक बात चीन की ब्लैकलिस्ट कंपनियों की संख्या 59 पहुंच गयी है।
क्या पड़ेगा असर?
इन कंपनियों के ब्लैकलिस्ट होने से इन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा पहली चीज तो यह कि ये सभी कंपनियों की छवि दुनिया भर में खराब होगी क्योंकि अमेरिका जैसे देश ने इन्हें ब्लैकलिस्ट किया है इसलिए बाकी देश भी अमेरिका के इस फैसले को अपने देश मे भी लागू कर सकते हैं।दूसरा यह है कि ये सभी कंपनियों में अब कोई भी अमेरिकी निवेशक निवेश नही करेंगे जिससे इन कंपनियों को भारी नुकसान होगा साथ ही इन्हें अमेरिका में वयापार करने में काफी दिक्कत होगी और इनके पास अमेरिका छोड़ के जाने के अलावा और कोई रास्ता नही बचेगा।
Read Also-
चीन ने बनाया कृत्रिम सूरज,16 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक है तापमान
: चीन ने बनाया कृत्रिम सूरज,16 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक है तापमान
Mon, Jun 7, 2021
चीन ने प्रकृति से खिलवाड़ करने का अपने रवैया छोड़ा नही है।चीन आये दिन कुछ न कुछ ऐसे प्रयोग करता रहता है जिससे या तो प्रकृति को या फिर मानवता को खतरा होता है।अब इसी कड़ी में चीन ने एक नया प्रयोग या यूं कहें कि अविष्कार(invention) किया है और यह अविष्कार है कृत्रिम सूरज(artificial sun).
दरअसल चीन ने यह दावा किया है कि उसने सूरज से भी ज्यादा गर्म व तेज कृत्रिम सूरज बना लिया है।चीन यह दावा करता है कि उसके वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया कृत्रिम सूरज असली सूरज से 10 गुना ज्यादा ताकतवर है व उससे कहीं अधिक ऊर्जा प्रदान कर सजता है।
अविष्कार सदैव ही मानव की भलाई के लिए किए जाते है परंतु जब अविष्कार प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके किये जायें तो इसके पूरे दुनिया को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।कोरोना वायरस और कुछ नही बल्कि चीन द्वारा प्रकृति से किये गए खिलवाड़ का ही नतीजा है और इसका मानवता पे क्या असर पड़ा है ये सब भली भांति जानते हैं।
जाने कृत्रिम सूरज से जुड़ी कुछ एहम बातें:
चीन के आधिकारिक जानकारी के मुताबिक वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गए नकली सूरज ने 10 सेकंड के लिए 16 करोड़ डिग्री सेल्सियस तामपान पर पहुचकर सारे रिकॉर्डर(record) तोड़ दिए।इसिनके साथ इस नकली सूरज ने 100 सेकंड तक 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान को बरकरार रखा।
इसे चीन के सबसे बड़े और सबसे उन्नत परमाणु संलयन प्रायोगिक अनुसंधान उपकरण के द्वारा बनाया गया है जो कि गर्म प्लाज़्मा(plasma) को फ्यूज़(fuse) करता है तथा प्राकर्तिक सूरज व सितारों के होने वाली परमाणु संलयन प्रक्रिया को दोहराता है।इसी वजह से ये असली सूरज की भांति अत्यधिक गर्मी व ऊर्जा निकालता है।
और कहां ऐसे प्रयोग चल रहे हैं?
इस तरह के प्रयोग चीन के अलावा अन्य कई देश जैसे फ्रांस(France) व दक्षिण कोरिया(
South Korea
) भी कर रहें है।हालांकि फ्रांस के इस प्रयोग को पूरा होने में थोड़ा समय लगेगा जबकि दक्षिण कोरिया ने कुछ समय पहली ही अपने कृत्रिम सूरज का सफल परीक्षण कर लिया था।
Read Also-
रक्षा मंत्रालय ने 50 हज़ार करोड़ के 6 सबमरीन के डिफेंस प्रस्ताव को दी मंजूरी,समुद्र में बढ़ेगा भारत का दम
: अमेरिका लगाएगा चीन पर 10 लाख करोड़ का जुर्माना,जानिए पूरा सच
Sun, Jun 6, 2021
कोरोना वायरस ने दुनिया भर में कोहराम मच रखा है और दुनिया का हर देश इस भयानक वायरस से परेशान है।इस वायरस ने हर वर्ग के लोगों को मुसीबत में दाल दिया है फिर चाहे वो अमीर हो या फिर गरीब।इसी कोरोना वायरस ने चीन और अमेरिका के बीच दुश्मनी की एक नई इबारत लिखने का काम किया है।
दुनिया भर के वैज्ञानिक कई महीनों से शोध कर रहे हैं कि आखिर दुनिया मे तबाही मचाने वाला ये वायरस उत्पन्न कहा से हुआ।पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के मन मे सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि इस वायरस की उत्पत्ति प्राकर्तिक है या फिर इसे मानव द्वारा बनाया गया है।
वास्तविकता में तो कोरोना वायरस को सबसे पहले चीन के वुहान शहर में पाया गया था उसके बाद से दुनिया का कोई ऐसे कोना नही बचा जहा इस वायरस ने अपना कहर न बरपाया हो।इसी बात पर दुनिया असमंजस की स्थिति में है कुछ देश सीधे तौर पे मानते हैं कि कोरोना वायरस को चीन ने अपनी वुहान लैब में बनाया है और चीन को इसका हर्जाना देना होगा तो वहीं कुछ देश मानते है कि ये एक प्राकर्तिक वायरस है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल अमेरिका उन देशों में सबसे आगे है जहां कोरोना ने भयानक तबाही मचाई है व कई लोगों की जान ली है।अमेरिका में ही अब तक सर्वाधिक केस मिलें है और सर्वाधिक मृत्यु भी वही पर हुईं हैं।ऐसे में अमेरिका का गुस्सा होने जायज भी है।
जब कोरोना अमेरिका में फैला तब अमेरिका के
राष्ट्रपति ट्रम्प
थे और वे चीन के खिलाफ कोरोना को लेके काफी सख्त थे उनका सीधे तौर पे मानना था कि इस वायरस को चीन ने जानबूझकर दुनिया मे फैलाया और यह वायरस चीन की वुहान लैब में बना है।इसी वजह से ट्रम्प कोरोना को चीनी वायरस भी कहा करते थे।
अब जब कई सारे वैज्ञानिकों ने यह माना कि चीन के वुहान लैब से ही निकला है और चीन इसके विरुद्ध में पर्याप्त साक्ष्य भी नही दे पाया तो ट्रम्प ने कहा कि मैं सही था यह चीनी वायरस ही है और इसके लिए चीन को 10 लाख करोड़ का जुर्माना देना होगा।हालांकि अब ट्रम्प राष्ट्रपति नही है इसलिए इस पर फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ही करेंगे।
Read Also-
World Environment Day 2021: जानिए इसका इतिहास,महत्व और इस बार की थीम