महासमुंद-आखिर क्यों नहीं हो रही संत लाल मुखर्जी की अनुकम्पा की जांच : क्या संत लाल मुखर्जी के सिर पर है किसी बड़े नेता हाथ? जो अब तक बचा रही है प्रशासनिक जांच से!
फिरोज खान संभाग प्रमुख रायपुर
Mon, Jan 26, 2026
वर्ष 2025 के अंतिम तिमाही में फर्जी अनुकम्पा नियुक्ति पाने के आरोप में सुर्खियों में रहे महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला गौरटेक के प्रधान पाठक संत लाल मुखर्जी
छत्तीसगढ़ के प्रमुख समाचार पत्रों ,डिजिटल मीडिया में उनकी अनुकम्पा नियुक्ति की जांच व फर्जी नियुक्ति पाए जाने पर कार्यवाही की मांग तेजी से बढ़ने लगा था पर ऐसा क्या है जो शासन प्रशासन को कार्यवाही करनी की बात बहुत दूर की बात है जो जांच तक करने से रोकती है क्या संत लाल मुखर्जी पर है किसी बड़े नेता हाथ क्या अधिकारियों पर है कोई दबाव जो छोटे से गांव में रहने वाले व्यक्ति की नियुक्ति की जांच कर एक जांच प्रतिवेदन तक नहीं बना पा रहे है सवाल का विषय है कि आखिर क्यों क्यों नहीं हो रही संत लाल मुखर्जी की अनुकम्पा नियुक्ति की जांच ?
समाचार पत्रों व अन्य मीडिया चैनलों के अनुसार संत लाल मुखर्जी (सहायक शिक्षक के पद पर अनुकम्पा से नियुक्ति)वर्तमान में प्रधान पाठक और संकुल समन्वयक के रूप में प्राथमिक शाला गौरटेक में पदस्थ है
90 के दशक से इनकी कहानी शुरु होती है 90 के दशक में सहायक शिक्षक स्व कन्हैया लाल चौहान के आकस्मिक मृत्यु हो जाने के पश्चात तथाकथित तौर पर संत लाल मुखर्जी द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्व कन्हैया लाल चौहान के परिवार को मिलने वाली अनुकम्पा को संत लाल मुखर्जी द्वारा हासिल कर लिया गया तत्कालिक समय मृत सहायक शिक्षक का नन्हा सा बालक था जो लगभग एक या डेढ़ वर्षों का था । जिसे मृत सहायक शिक्षक के माता श्रीमती कर्मायत बाई ने अपने पास रख पालन पोषण किया इसी बीच जब कर्मायत बाई यह पता चला कि उसके परिवार को मिलने वाली अनुकम्पा पर कोई संत लाल मुखर्जी सिंघनपुर निवासी को सहायक शिक्षक के पद नियुक्ति मिल गई है तब। कर्मायत बाई ने कार्यालय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण रायपुर संभाग रायपुर को वर्ष 1995 में संत लाल मुखर्जी सहायक शिक्षक की अनुकम्पा नियुक्ति की जांच कर नियुक्ति निरस्त करने की मांग की गई। जिस पत्र पर आवश्यक कार्यवाही हेतु उप संचालक लोक शिक्षण शिक्षा जिला महासमुंद को पत्र प्रेषित किया गया जिसमें यह उल्लेख था कि शासन की नियमों के प्रकाश में आवश्यक कार्यवाही करते हुए इस कार्यालय और आवेदिका कर्मायत बाई को अवगत करावे । परंतु आज लगभग 30 वर्षों बीत जाने के बाद भी आवेदिका कर्मायत बाई को किसी प्रकार से न्याय नहीं मिला आवेदिका के कथन अनुसार उसके कम पढ़े लिखे होने के फायदा उठा कर तत्कालीन समय के कुछ तथाकथित पत्रकारों द्वारा उसे न्याय दिलाने की झूठी उम्मीदें मिलती रही बेचारी बेसहारा कर्मायत बाई अपने नन्हे से पोते को लेकर न्याय दिलवाने की झूठी उम्मीद देने वालों के चक्कर काटने लगी जिससे उसके पास जमा रखी जमा पूंजी न्याय की उम्मीद में खाली होने लगे फिर भी कर्मायत बाई की आस नहीं टूटी उसने अपने बचे कूचे जमीन को बेचकर न्याय में लगने वाले को खर्चों को तत्कालीन समय के तथाकथित पत्रकारों को वहन किया एक समय ऐसा आया नन्हे से बालक प्रेम सागर चौहान के भरण पोषण व खुद के भरण पोषण के लोगों के घर बर्तन मांजने को मजबूर हो गई क्या बीतती होगी उस मां पे जिसने अपने जवान बेटे खोने के साथ उसके पोते प्रेम सागर चौहान भविष्य की चिंता में अपनी जमा पूंजी खेत बची कुछ की जमीन तक बेच डाली और कुछ लोग उसे जूठा दिलासा दिलाते दिलाते लूट लूट कर मलाई खाते रहे मलाई खाते खाते डूबते को तिनके का सहारा इतना भी सही ढंग से सहयोग कर देते उसे बेचारी बुढी मां और बिन माता पिता के पले हुए बच्चे को शायद आज दर बदर के ठोकर खाने की नौबत नहीं आती शायद वो परिवार वंश उस मृत सहायक शिक्षक का बेटा भी समय रहते अपने पिता की मिलने वाली अनुकम्पा पर किसी न किसी शासकीय सेवा में सेवारत होता अपनी दादी कर्मायत बाई अच्छे से देख भाल कर पाता
साल गुजरते गए अनुकंपा पर नियुक्त हुआ सहायक शिक्षक प्रधान के पद पर पदोन्नत हुआ संकुल समन्वय तक बन गया पर अब तक उस पर किसी भी प्रकार से शासन प्रशासन की ओर से कार्यवाही तो दूर जांच तक नहीं की गई नन्हा सा बालक प्रेम सागर बालिग हुआ होने पर वह भी अपने पिता के अपने और अपने परिवार पर आपबीती पर न्याय के लिए अपने बूढ़ी दादी कर्मायत बाई के न्याय के लिए संघर्षों को देखते हुए न्याय पाने के शासन प्रशासन से अपनी गोहार लगाने लगा पर उसकी और से न्याय के लिए उठने वाली आवाज को षड्यंत्र पूर्वक दबा दिया गया होगा क्यों बीते वर्ष अंतिम तिमाही में संत लाल मुखर्जी के अनुकम्पा नियुक्ति की जांच की मांग प्रमुख अखबारों और मिडिया में तेज थीं पर उस पर हुआ क्या जांच हुई या नहीं अब तक या प्रेम सागर चौहान को कम पढ़ा लिखा समझ कर उसके ओर से उठने वाली आवाज को षडयंत्र पूर्वक दबा दिया गया सोचने का विषय है ।
वही इस संदर्भ में फिरोज खान आरटीआई कार्यरता और प्रेस रिपोर्टर ने बताया कि संत लाल मुखर्जी के नियुक्ति संबंधित दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से प्राप्त किया है और कुछ ऐसे दस्तावेज जो संत लाल मुखर्जी द्वारा लिए गए अनुकम्पा नियुक्ति को फर्जी साबित करने में अधिकारियों को सहयोग प्रदान कर सकते है ऐसे तथ्यों और दस्तावेजों के साथ दिनांक 14/10/25 कलेक्टर के माध्यम से जांच करने व उचित कार्यवाही हेतु आवेदन आवेदक फिरोज खान द्वारा किया गया था पर तीन माह बीत जाने के बाद भी कोई जांच कार्यवाही नहीं होने से पुनः 20/1/26 को कलेक्टर जनदर्शन महासमुंद में स्मरण पत्र के माध्यम से जांच एवं उचित कार्यवाही हेतु अवगत कराया गया देखना ये है कि संत लाल मुखर्जी की क्या कभी जांच हो पाएगी ?
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