रतलाम

नहीं सुने रहे एसी में बैठे अफसर: तपती धूप में बैठा मासूम हुआ बीमार, भर्ती होने के बाद फिर बैठा धरने पर

रतलाम. आसमानी आग के बीच कलेक्ट्रेट में दो परिवार बीते दो दिन से अनशन पर बैठे है। वहीं सामने कलेक्ट्रेट भवन में एसी में बैठे अधिकारी इनकी सुनवाई अब तक नहीं कर सके है। इन परिवारों की मांग बस इतनी सी है कि वर्षों पुरानी उनकी जो दुकानें एक शिकायत पर हटाई गई है, प्रशासन उन्हे फिर से लगवा दें। अपनी मांग के चलते धरने पर बैठे दो परिवार में से एक का बच्चा गर्मी की चपेट में आने से मंगलवार सुबह बीमार हो गया। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे भर्ती कर बोतल चढ़ाई गई। दोपहर में छुट्टी होते ही बच्चा फिर से परिजनों के पास धरने पर बैठ गया।

मलवासा के श्रवण कुमार चौधरी का कहना है कि वह अधिकारियों से उसने मंगलवार को भी मिलकर चर्चा की लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो सकी। इस बीच सुबह उसके साथ धरने पर बैठे मलवासा के बाबूलाल के पुत्र जीवन की गर्मी में घबराहट होने व उल्टी होने से उसे परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। बाल चिकित्सालय में बालक को भर्ती कर उसे बोतल चढ़ाई गई, जिसके चलते दोपहर में उसकी हालत ठीक हुई तो बोतल उतरने के बाद वह फिर से पिता के पास कलेक्ट्रेट में धरने पर जाकर बैठ गया। इस दौरान सुबह से शाम तक अधिकारी दफ्तर से अंदर बाहर होते रहे लेकिन कोई इनसे बात कर इन्हें मना नहीं पाया।

 

गांव के बाहर जमीन देने को तैयार

श्रवण ने बताया कि अधिकारियों से चर्चा के बाद उनका कहना है कि तुम्हे गांव के बाहर जमीन उपलब्ध करा देते है, वहां पर तुम अपनी दुकान चला लो लेकिन दोनों परिवार इस बात पर राजी नहीं हुए। उनका कहना है कि जिस जगह से प्रशासन ने उन्हे हटाया है, उसी सरकारी जमीन पर शिकायतकर्ता ने फेंसिंग कर ली है, तो प्रशासन अब उसका कब्जा भी हटाए और उन्हे जो भूमि गांव के बाहर देने का बोल रहे है, उसे लेकर वे वहां क्या करेंगे, क्यो कि वहां पर जब बस्ती नहीं है, तो कोई उनकी दुकान पर क्यो आएगा। गांव के बाहर दुकान लगाने से उनकी आर्थिक तंगी बनी रहेगी।

पटवारी पहुंचे गांव
पीडि़त परिवार को दो दिन से धूप में अनशन पर देखने के बाद मंगलवार शाम को प्रशासन का दिल पसीजा और पटवारी मलवासा गांव जाकर शासकीय जमीन तलाश कर पीडि़त परिवारों को देने के लिए निकले। इस बीच शाम करीब ६ बजे तक पीडि़तों को यह नहीं बताया गया था कि उन्हे कौन सी जमीन किस स्थान पर दी जा रही है। गांव के बाहर प्रशासन जो जमीन देने को तैयार था, उसे लेने से इनके द्वारा साफ तौर पर इनकार कर दिया गया। इन सब के बीच प्रशासनिक अमला भी जमीन की तलाश में लग गया है।

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Sachin Mali

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